Thursday, 7 December 2017

इश्क़

क्या है इश्क़?
ख़ूबसूरती के सम्मोहन में बंधी हुई नजरें या फूल के इर्द गिर्द मंडराते हुए भंवरे, या फिर खुशबू के आकर्षण में बंधा हुआ मन।

नहीं ये इश्क़ नहीं हो सकता।

इश्क़ तो फूल के साथ अडिग उस कांटे की तरह है जिस पर फूल की उम्र, रंगत और खुशबू का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हर मौसम में, हर हाल में, फूल के खिलने से लेकर मुरझाने तक साथ होता है। कांटा उस जीवनसाथी की तरह होता है जो हमेशा साथ निभाने का संकल्प लेता है, किसी भी हाल में किसी भी परिस्थि में, और साथ निभाता भी है। कांटा चुभता तो है पर उसकि ऊँगली में जो फूल को छूने की कोशिस करता है या यूँ कहें उसके इश्क़ को छूने की कोशिस करता है।

अब कोई जा के बताए उन भवरों को जो बेवजह, बेमतलब भटक रहे हैं कि फूलों ने भवरों को चुनना छोड़ दिया। वो खुश हैं अपने अडिग और शाश्वत इश्क़ के साथ।

#आस्था

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