Sunday, 27 May 2018

भगवान तुझे लेकर के एक रोज़ जमीं पर आऊँ।
तू मुझको खुद में खोजे मैं तुझे नजर न आऊँ।

तेरी हर एक नादानी का मैं कच्चा चिट्ठा खोलूँ,
तू मुँह से कुछ न बोले मैं तुझको खूब सुनाऊँ।

तेरी कोरी मस्त नजर में सपनों का सुरमा भर दूँ,
फिर नींद तेरी गायब कर तुझे सारी रात जगाऊँ।

कभी प्यार कभी नादानी कभी रूठूँ कभी मनाऊँ
तुझे एक जगह बैठा कर जीवन का गणित पढ़ाऊँ।

मौसम में धुन्ध जमा है या आँखे बन्द हैं तेरी,
कुछ दिन की छुट्टी ले तू तेरी दुनियाँ तूझे दिखाऊँ।

#आस्था

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